श्री यू राजा बाबू
श्री यू राजा बाबू बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमताओं के डिजाइन, विकास और सफल कार्यनिष्पादन के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 1988 में भारतीय वायु सेना में सेवाऍं आरंभ कर अपना कैरियर शुरू किया और बाद में 1995 में डी आर डी ओ में आए।
35 वर्षों के अपने पेशेवर एयरोस्पेस कैरियर के दौरान, उन्होंने विमान, हेलीकॉप्टर और कई मिसाइल प्रणालियों के विकास पर काम किया है। अनुसंधान केंद्र इमारत में कार्यक्रम निदेशक व प्रबंध निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के डिजाइन, विकास और इसके सफल प्रदर्शन के लिए आवश्यक जोर दिया। उनके नेतृत्व में, "मिशन शक्ति," भारत का पहला एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण (ए-सैट) का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया है।
अनुसंधान केंद्र इमारत (आर सी आई) में निदेशक के रूप में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और मिशन मोड परियोजनाओं के विकास, सभी सामरिक, एटीजीएम, क्रूज मिसाइलों और सशस्त्र बलों के लिए अस्त्र-प्रणालियों के लिए उन्नत मिसाइल उड्डयानिकी के विकास के क्षेत्र में काम किया।
भारतीय रक्षा कार्यक्रमों में उनकी तकनीकी और तकनीकी-प्रबंधकीय उपलब्धियों ने उन्हें "महानिदेशक, मिसाइल और सामरिक प्रणाली" (डी जी एम एस एस) के पद तक पहुंचाया।
रक्षा अनुप्रयोगों के लिए उनके सरल प्रयास और योगदान ने उन्हें कई पहचान दिलाईं। उन्हें ‘मिशन शक्ति’ के प्रदर्शन का सफलतापूर्वक नेतृत्व करने के लिए Path breaking research & outstanding technology development award से सम्मानित किया गया।
उन्हें प्रदान किए गए अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों में आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता के लिए अग्नि पुरस्कार, डी आर डी ओ साइंटिस्ट ऑफ द ईयर और विज्ञान प्रतिभा सम्मान पुरस्कार आदि शामिल हैं।
वे इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (आईई) के एक सदस्य के साथ-साथ कई प्रोफेशनल सोसायटी के आजीवन सदस्य भी हैं।
वह ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवनंतपुरम लिमिटेड के निदेशक मंडल के सदस्य हैं।
